भूल गये गीतों को रूठ गये मीतों को प्यार ने बुलाया नव बसंत आया भूल गये गीतों को रूठ गये मीतों को प्यार ने बुलाया नव बसंत आया
तरक्की हो रही है यहां क्योंकि, मेरा गांव शहर की ओर बढ़ रहा है। तरक्की हो रही है यहां क्योंकि, मेरा गांव शहर की ओर बढ़ रहा है।
कविता लिखना भीवैज्ञानिक खोज सेकुछ कम नही है कविता लिखना भीवैज्ञानिक खोज सेकुछ कम नही है
तो समझिये बस निकट ही है सुख की भोर ! तो समझिये बस निकट ही है सुख की भोर !
बुन लूँ उमंगों की चूनर, लगा लूँ माथे से धरा। बुन लूँ उमंगों की चूनर, लगा लूँ माथे से धरा।
बातें हजार कर रहे हैं जानते हैं तुझसे प्यार कर रहे हैं। बातें हजार कर रहे हैं जानते हैं तुझसे प्यार कर रहे हैं।